SHARE THIS:
Link: http://www.theraigarsamaj.com

Raigar Community Website

Raigar Community Website www.theraigarsamaj.com 100% Full free Matrimonial is also available. www.raigarsamaj.com █║▌│█│║▌║││█║▌║▌║║││ Our Raigar Samaj Website is www.theraigarsamaj.com ▀██▀───▀██▀─▀██──██─▀██▀▀ ▀ ─██─────██───██▄█▀───██▄█─ ─██─────██───██▀█▄───██▀█─ ▄██▄▄█─▄██▄─▄██──██─▄██▄▄ ▄ This Page रैगर (Raigar), रैगेर (Raiger), रेगर (Regar), रैंजर (Rangar), रेहगर, रेगड़, रेगढ़, रेयगर, रायगर, जटिया, सिंधी जटिया, बोला, एवं लस्कररिया रैगर इन सभी नामों से रैगर समाज को जाना व संबोधित किया जाता है, सम्वभत् 1408 के समय से पहले ‘रैगर समाज’ को रंघड़ राजपूत के नाम से भी जाना जाता था। राजस्थागन के कई क्षेत्रों मे रैगर समाज को रैगर जटिया व जटिया समाज के नाम से भी पुकारा जाता है, लेकिन इतने तरह के नामों के बाद भी हमारा रैगर समाज एक है। श्री चन्द नमल नवल द्वारा लिखित पुस्तबक ‘’रैगर जाति : इतिहास एवं संस्कृनति’’ के अनुसार रैगर समाज सूर्यवंश के अंतर्गत आता है। हम सूर्यवंश के अंतर्गत सगर वंशी है। रैगर समाज के लोग एक विशेष स्थान पर ही एक साथ रहना पसंद करते है तथा रूढी़वादिताओं की मान्य’ताओं को छोडना पसंद नही करते है जिसके चलते समय और व्यिय अधिक करना पडता है। रैगर समाज के लोग आपस मे मारवाडी में बातचीत करते है एवं दूसरों के साथ बात करने के लिये हिन्दी भाषा का उपयोग करते है एवं भोजन मे ये शाकाहारी एवं मांसाहारी दोनों ही प्रकार के होते है खाने मे यह समाज गैहु, बाजरा, जौ, चावल एवं चना का मुख्यै रूप से उपयोग करते है लेकिन मुख्या तोर पर गेहूं प्रधान आहार लेते है कुछ लोगों ने आर्य समाज एवं राधा स्वातमी जी के विचारों से प्रेरित हो कर पूर्ण रूप से शाकाहारी बन गये है विवाह के लिय रैगर समाज मे अपने परिवार के परिजनो जैसे दादा, दादी, नाना, नानी, आदि परिवारों के गोत्र को छोडकर विवाह किया जाता है एवं विवाह के लिये अपने आस पास के लोगों की सहायता से निकट स्था न पर ही विवाह के प्रयास किये जाते है एवं गॉवों मे सगाई (रिश्तां तय) बचपन मे ही 10-12 वर्ष की उम्र मे ही कर दिया जाता है, समाज में बाल विवाह की भी प्रथा है लेकिन दुलहन को बालिग हो जाने पर ही उसे गोना कर ससुराल भेजा जाता है, लेकिन अब नई पीडी के द्वारा इसका विरोध किया जाने लगा है एवं जागरूकता के चलते अब विवाह बालिग हो ने पर ही किया जाने लगा है शादी दुलहन के घर पर हिन्दू रिति-रि‍वाजों से होती है, दहेज के रूप मे इलेक्ट्रा निक उपकरण, घर मे काम आने वाले बर्तन, पलंग, बिस्तूर, एक पितल की बडी थाली, काशी की थाली और लोठा मुख्यस रूप से दिया जाता है, शादी हो जाने के पश्चामत् वर-वधू कुल के देवी देवताओं की पूजा करवायी जाती है इस प्रकार शादी की मुख्यध रसमे निभाई जाती है। कही कही पर समाज के सक्रिय लोगो द्वारा सामुहिक विवाह सम्मेईलन का आयोजन भी समय समय पर किया जाता है जिसमे अनाथ बच्चोंज की शादी बिना कोई शुल्क लिये कि जाती है। मृत्यु के संदर्भ मे लेख है कि मृत्यु् होने के पश्‍चात् उसका दाह संसकार हिन्दूत रिति से किया जाता है एवं दाह संसकार के तीन दिन बाद बची हुई हड्डियों को इकठ्ठा कर गंगा नदी मे विसर्जित किये जाने की मान्युता है एवं मृत्यु के बारह दिन पश्चावत् जाति भोज रखा जाता है जिसे मौसर या घाटा कहा जाता है लेकिन अभी कुछ वर्षों पूर्व शासन के निर्देशानुसार मौसर पर कानूनी तोर पर प्रतिबंध लगा दिया गया है ले‍कि‍न अभी भी कही कही मौसर हो रहे है। रैगर समाज मे कूल के देवी देवता जैसे पुरवज बावजी, भेरू बावजी, सती माता, ड्याडी माता (कुल देवी) एवं झूणजी बावजी की पुजा मुख्यज तोर से की जाती है एवं हिन्दूा पूजा पाठ के अनुसार मुर्तिं पुजा दैनिक रूप से की जाती एवं साथ ही साथ सभी हिन्दूस देवी देवताओं को माना जाता है एवं भगवान रामदेव बाबा (रूणिजा वाले) के गॉव-गॉव मे मंदिर है मंदिर मे पूजा-पाठ पंडित रखवा कर किया जाता है, संत रविदास, कबीर दास के भजन गाये जाते है, इन सभी को विशेष तोर से माना एवं पूजा जाता है एवं इन देवताओं संबंधित त्यौ,हारों पर भजन-किर्तन आयोजन कर विशेष रूप से हर्षों उल्ला स के साथ मनाया जाता है, समाज मे यज्ञ, हवन, कथा, भजन मंडली का आयोजन भी किया जाता है हिन्दूआ समाज के सारे धार्मिक त्यौहार जैसे मकर सकरांती, होली, रक्षाबंधन, जन्माष्टमी, गणेश जन्मोतत्साव, नवरात्री, दशहरा, दीवाली, गंरगोर की तीज, शिवरात्री, आदि त्यौ हारों को विशेष तोर से मनाया जाता है एवं समाज मे अपने पूर्ण जीवनकाल मे एक बार जरूर चार धाम की यात्रा करने का महत्व है। रैगर समाज का पारंपरिक पेशा चमडे की रंगाई, खेती करना है पर वर्तमान मे चमडे के कार्य करने पर म.प्र. मे पूर्ण रूप से समाज ने प्रतिबंध लगा दिया है इनमे से कई लोग मजदूरी करते है लेकिन अब यह चमडे कार्य धीरे-धीरे समाज के लोगों द्वारा बंद किया जाने लगा है, कुछ समाज के धनी व्याक्तिवयों द्वारा इसे बडे स्तर पर अभी भी किया जा रहा है एवं ग्रामीण इलाकों मे अब इस कार्य को छोडकर खेती को विशेष महत्व दिया जा रहा है तथा कुछ मकान बनाने (मिस्त्री ) का कार्य करने लगे है अब समाज के लोग राजनिति मे भी भाग ले रहे है, आधुनिकता के दोर मे समाज के कई लोग उच्च वर्ग मे सरकारी एवं गैर सरकारी संस्‍थानों मे कार्यरत है कई शहरों मे अब रैगर समाज महासभाओं एवं रैगर पंचायतो का आयोजन भी किया जाने लगा है और इन सभाओं मे समाज की समस्याओं, कुरितियों, एवं मुख्यई मुद्दो पर चर्चा कर निर्णय लिये जाते है तथा कोर्ट-कचहरी की झंझटों से बचने के लिये समाज के प्रमुख पंचों द्वारा प्रतिबंध लगा कर बैठक मे निर्णय ले लिये जाते है एवं सहमति बनने पर नियम बद्ध रूप से लागू भी किया जाता है इन सबसे अलग गॉव मे आज भी रैगर समाज के साथ छुआछुत का खेल उच्च वर्ग के लोगों द्वारा जारी है एवं समाज आज भी ग्रामीण इलाकों मे अपने अस्ति त्वो की लडाई लड रहा है लेकिन शहरों मे अब धीरे धीरे छुआछुत खत्‍म होती तो नज़र आ रही है लेकिन पूर्ण रूप से नहीं। कही ना कही किसी ना किसी रूप मे भेदभाव देखने को मिल ही जाता है। लेकिन इन सब के चलते हम आशा करते है कि सरकार ओर कानून इन भेदभाव के मुद्दो पर संज्ञान लेगा ओर इनमें कमी आयेगी। आईये हम सब एक प्रतिज्ञा ले कि हम अपने समाज मे व्याप्त कुरितियों, भेदभाव एवं छुआछुत से लडेनें के लिये प्रतिबध होवेंगें ओर इनका पूरजोर विरोध करेंगें ओर देश और समाज की प्रगति मे विशेष भागीदारी निभाने के लिये प्रयास करेंगें, तो समाज इस विकास की दौड में सम्मिलित हो सकेगा। समाज के हर नागरिक का कर्तव्ये है कि सब मिलकर अपनी भागीदारी निभायें तो प्रगति की राह समाज को जल्दय मिल सकेगी। कुछ समाज के लोग शासकीय नोकरियों मे लग गये है पर वो समाज से हट कर चलने लगे है जैसे नोकरी वाले नोकरी वालों के यहॉ ही सम्बंलध करना पसन्दे करते है तथा अन्य समाजों मे भी अपने बच्चोंस का संबंध करने लगे है इस प्रकार की मानसिकता से हमे बचना पडेगा। समाज के पिछे छुटे गरीब वर्ग को आगे बढाने का प्रयास करना होगा। एवं सा‍थ ही साथ समाज की एकता अखण्डमता और देश को साथ लेकर चलने का प्रयास करे ताकि रैगर समाज गौरव महसूस कर सकें आज हमारे समाज को विद्वान, बु‍द्धिजीवी, अनुभवी और समाज सेवा वाले व्येक्तियों की जरूरत है। हमे अपने समाज को आपस मे मिल कर बांधकर रखना होगा नहीं तो समाज दिशाहीन होकर लुप्त हो सकता है। जिस प्रकार एक व्यलक्ति अपने परिवार की पूर्ण जिम्मे‍दारी उठाता है उसी प्रकार उसे इस बात को भी समझना होगा की परिवार समाज का ही एक हिस्सात है ओर जितनी जिम्मेरदारी उसकी अपने परिवार के प्रति है उतनी ही अपने समाज के प्रति भी होना चाहिये। आज के युवा वर्ग द्वारा इस महत्व पूर्ण जिम्मेदारी को ईमानदारी से निभाना होगा। आईये हम सब मिलकर समाज की बुराईयों, कुरितियों, रूडिवादिताओं से उबारतें हुए समाज को नई राह दिखाये, ओर समाज के प्रति अपने कर्त्तव्यि का निर्वाह करने का सफल प्रयास करें। लेखक ब्रजेश आर्य (हंजावलियॉ) 9993338909 मन्‍दसौर ^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^ रैगर समाज के बारे मे ओर अधिक जानकारी के लिये नीचे दी गई इस लिंक पर Click करे एवं फिर इस Community Page को Join करे https://www.facebook.com/raigar.samaj?sk=app_154272794636138 सहयोग के लिये धन्‍यवाद ************************************************************ The Home of Raigar Community Portal. A common stage to bring people of Raigar Community together. Browse Raigar News and regularly updated articles. Submit contents and join this movement to take the Raigar Community a step ahead. This community is dedicated to Raigar Samaj only. Our prime motive is the development of Raigar Samaj by following Baba Saheb’s 3 Golden rule: Shikshit Bano (be educated), Sangathit Ho (be united) & Sangarsh Karo. So our first step is to add all the net users of our community to: 1. Motivate/Guide student members. 2. Create different topics/polls related to Social, Economical & Educational issues for discussion. 3. Interact with each other or profession wise interaction. 4. Provide links for Books, Employments and other Informations useful to all. This community belongs to ‘US’ not to me, so WE ARE EQUALLY PARTNER & HAVE EQUALLY RESPONSIBILITY 2 DEVELOP IT. v all can make it MORE ACTIVE & POWERFUL by adding more & more members to it & by actively participating at the ‘forum’ & ‘polls’ of this community or by creating new forum/polls. You all r requested 2 visit our only Community Portal and "LIKE" it https://www.facebook.com/raigar.samaj रैगर समाज के बारे मे ओर अधिक जानकारी के लिये नीचे दी गई इस लिंक पर Click करे एवं फिर इस Community Page को Join करे..................... https://www.facebook.com/raigar.samaj UR VALUABLE SUGGESTIONS ARE ALWAYS WELCOME, IF ANY. **THANX A LOT FOR MAKING IT A BIGGER PLATFORM** ************************************************************** क्या आप रैगर समाज को और अधिक निकटता से जानना चाहते है तो आईये हम रैगर समाज को जाने और पहचाने। हमारा उदद्शय यह है कि हम रैगर समाज के बारे मे जानकारीयॉ एवं खबरें इकठ्ठाकर आपको उपलब्ध कराये, अगर आप इसी तरह से रैगर समाज के बारे मे जानकारीयॉ चाहते है तो हमारे साथ जुडे ओर समाज के प्रति अपना महत्वयपूर्ण समय एवं योगदान अवशय प्रदान करे हमारे साथ जुडने के लिये आप प्रथम कदम के रूप मे इस ‘’ रैगर समाज ‘’ की कम्युनिटी को ज्वाईन करे, हम इसके माध्यजम् से आपको सूचना प्रदान करते रहेगें और यह कम्युनिटी आपके ओर हमारे बीच की एक महत्वनपूर्ण कडी है, सहयोग के लिए रैगर बंधुओं को मेरी ओर से बहुत बहुत धन्यववाद् भवदीय ब्रजेश आर्य (गोत्र हंजावलियॉ) मन्दसौर (मध्य प्रदेश) मोबाईल नम्बर 9993338909
read more..

Raigar Community Website

Website Info

Category: Society/Culture Website
Found: 03.07.2015

Rate!!

Please write a comment:

User ratings